Click Here to Verify Your Membership
First Post Last Post
Incest चुत एक पहेली (Completed)

(22-02-2018, 10:23 PM)rajbr1981 : thanks

You Rock

Quote

अपडेट  १३

अब तक आपने पढ़ा..

दोपहर तक सब नॉर्मल हो चुका था।
हाँ मुनिया के पैर ठीक से काम नहीं कर रहे थे.. उसको चूत में दर्द था और उसको बुखार भी हो गया था.. तो रॉनी ने उसे कुछ दवा और ट्यूब देकर कहा कि वो कमरे से बाहर ना आए.. बस आराम करे, शाम तक ठीक हो जाएगी।

दोनों भाइयों ने लंच किया और टीवी देखने लगे.. तभी वहाँ सुनील और विवेक आ गए।
विवेक- हाय रॉनी हाय पुनीत.. कैसे हो..?
पुनीत- अरे आओ आओ.. तुम्हारा ही इंतजार था और टोनी कहाँ है.. वो नहीं आया क्या..?
सुनील- वो बस आता ही होगा.. हम जरा पहले आ गए।
रॉनी- वो साला कहाँ रह गया.. ऐसे तो बड़ा बोलता था एक बार मैं गेम में आ जाऊँ.. तो ऐसा कर दूँगा.. वैसा कर दूँगा.. अब गाण्ड फट गई क्या उसकी..?


अब आगे..

विवेक- अरे ऐसी बात नहीं है भाई वो यहाँ से कुछ दूर कॉलेज का कैंप लगा है वहाँ उसकी बहन भी है। मुझे फ़ोन किया था.. उसको वहाँ छोड़ कर आते वक़्त यहाँ आएगा वो..
रॉनी- अच्छा उस साले हरामी की बहन भी है क्या?
सुनील- हाँ यार बहन तो सबकी होती हैं.. उसमें नया क्या है.. बस बीवी नहीं है किसी के पास हा हा हा हा..
पुनीत- अबे कुत्ते गेम जीत और बना ले अबकी बार नई-नई बीवी.. पूरा मौका मिलेगा हा हा हा..
सन्नी- हैलो कमीनो.. क्या हाल हैं?

दोस्तो, यह है सन्नी इसकी उम्र 22 साल है.. अच्छी कद काठी का बांका जवान है.. लड़कियाँ इसको देख कर अपना बना लेने की तमन्ना रखती हैं.. मगर यह बिंदास है, हर महीने गर्लफ्रेण्ड बदलता है और मज़ा करता है।

पुनीत- अरे आओ आओ मेरे बब्बर शेर.. तुम्हारी ही कमी खल रही थी।
सन्नी- सब आ गए क्या?
विवेक ने बताया कि टोनी नहीं आया.. वो अपनी बहन को छोड़ कर आएगा।

तभी वहाँ टोनी भी आ गया.. उसके साथ कोमल भी थी। आज कोमल ने लाल रंग की स्कर्ट और काली टीशर्ट पहनी हुई थी, बहुत हल्का सा मेकअप किया हुआ था.. उसके होंठों पर लाल लिपस्टिक उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रही थी।

जब वो अदा के साथ चलकर आ रही थी उसके चूचे थिरक रहे थे और कमर नागिन की तरह बल खा रही थी। वो ऐसे चल रही थी जैसे कोई मॉडलिंग कर रही हो, उसको देखकर पुनीत की लार टपकने लगी।

टोनी- हैलो दोस्तो.. हाउ आर यू.. क्या मीटिंग चल रही है यहाँ पर?
विवेक- अरे आओ आओ बॉस.. आपका ही इंतजार हो रहा था.. लेकिन यह कोमल को यहाँ क्यों ले आए.. इसे तो आप कैंप छोड़ने गए थे ना..
सन्नी- अरे जाना तो वहीं था.. बाइक ने धोखा दे दिया.. आधे रास्ते में ही दम तोड़ दिया.. साली पंचर हो गई यहाँ तक ऑटो में आया हूँ।
सुनील- यहाँ ऑटो में आए.. सीधे वहीं चले जाते..
टोनी- अरे साला ऑटो वाला नहीं माना वहाँ जाने को.. तो मैंने कहा अच्छा फार्म पर छोड़ दे.. आगे मैं चला जाऊँगा..

ये सब बातें कर रहे थे और कोमल बड़ी शराफत के साथ एक तरफ खड़ी बस पुनीत के सामने नजरें झुका कर खड़ी थी और पुनीत भी बस उसको निहार रहा था।
बीच-बीच में कोमल पुनीत की ओर देखती और हल्का सा मुस्कुरा देती।
रॉनी- अब तू चाहता क्या है.. ये बोल?

टोनी- यार.. तू अपनी गाड़ी की चाभी देना जरा.. बस अभी इसको कैम्प तक छोड़ कर अभी आता हूँ.. उसके बाद अपनी मीटिंग शुरू..
पुनीत- अरे टोनी.. तेरी बहन बोल नहीं सकती क्या.. गूंगी है?

टोनी कुछ बोलता.. उसके पहले कोमल बड़ी सेक्सी अदा के साथ बोली- जी नहीं.. मैं बोल सकती हूँ.. मगर आप दोस्तों के बीच.. मैं क्या बोलूँ.. इसलिए चुप खड़ी हूँ।
पुनीत- अरे, कम से कम ही हैलो ही कर लेती..
टोनी- बस बस.. पुनीत ज़्यादा स्मार्ट मत बन.. ला चाभी दे.. इसको छोड़ कर आता हूँ.. अपन बाद में बात करेंगे।

कोई कुछ नहीं बोला और बस सब कोमल को ही निहारते रहे। रॉनी ने गाड़ी की चाभी टोनी को दी.. वो कोमल के साथ जाने लगा.. तो पुनीत की नज़र बस कोमल की मटकती गाण्ड को घूरती रही, उसका लौड़ा पैन्ट में टेंट बनाने लगा।
सन्नी- अरे बस भी कर.. चली गई वो.. अब क्या कैम्प तक अपनी नजरें ले जाएगा.. हा हा हा हा हा..

सभी ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे।

पुनीत- अबे चुप रहो कमीनों.. मैं तो बस यूँ ही देख रहा था.. कि लड़की बहुत ही खूबसूरत है।
विवेक- ये गलत बात है भाई.. टोनी अपना फ्रेण्ड है.. और उसकी बहन अपनी बहन जैसी ही है.. उसको ऐसे देखना ठीक नहीं है यार..
पुनीत- अबे चुप साले कुत्ते.. बहन होगी तेरी.. मैं तो उसको गर्लफ्रेण्ड बनाने की सोच रहा हूँ।
सुनील- ठीक कहा यार.. मेरी भी काफ़ी समय से उस पर नज़र थी.. साली एकदम से पटाखा लगती है।

सन्नी- अरे कमीनों.. अच्छा हुआ वो चली गई.. वरना तुम यहीं उसकी चूत का चीर-फाड़ कर देते।
विवेक- नहीं भाई.. कुछ भी कहो ये सब गलत है.. अगर टोनी को पता लगेगा तो वो लफड़ा करेगा।
रॉनी- क्या लफड़ा करेगा.. हमको मारेगा क्या..? अबे सालों हमारे फेंके हुए टुकड़े उठाते हो.. हमको आँख दिखाओगे क्या?
विवेक- रॉनी.. ये कुछ ज़्यादा हो रहा है समझे.. हम यहाँ बेइज़्ज़ती करवाने नहीं आए हैं..
सन्नी- अरे कूल यार.. दोस्तों में ये सब चलता रहता है..
पुनीत- अरे किसी को कोई प्राब्लम नहीं है.. तो तू क्यों भड़क रहा है?

सन्नी- हाँ सही है.. दोस्तों में ये सब चलता रहता है और पुनीत चाहे तो कुछ भी मुमकिन हो सकता है.. कहीं ऐसा ना हो कि टोनी खुद अपनी बहन को इसके हवाले कर दे..
सुनील- नहीं नहीं यार.. ऐसा नहीं हो सकता.. कोई भाई ऐसा नहीं कर सकता..
रॉनी- पैसे में बहुत ताक़त होती है साले.. हम जिसे चाहे खरीद लें..

विवेक- अच्छा अगर ये बात है.. तो कोमल को हासिल करके दिखाओ.. तब मानूँगा कि तुम कितने बड़े रईस हो..
पुनीत- तू मुझे चैलेन्ज करता है.. अब देख.. मैं कैसे टोनी को मनाता हूँ।

काफ़ी देर तक ये बहस चलती रही.. तब तक टोनी भी वापस आ गया..
टोनी- अरे क्या बात है.. किस बात पर इतना हंगामा हो रहा है।
सन्नी ने विवेक को चुप रहने का इशारा कर दिया.. ताकि बात बिगड़े ना..

पुनीत- अरे कुछ नहीं.. इस बार क्या करें.. बस इस बात पर बहस हो रही है.. ये सन्नी कहता है कि हर बार गर्लफ्रेण्ड को साथ लाते हैं और गेम खेलते हैं अबकी बार कुछ अलग ट्राइ करते हैं।
पुनीत ने ये बात सन्नी की तरफ़ आँख मारते हुए कही थी।

टोनी- अरे यार ऐसे सूखे-सूखे प्लान बनाओगे क्या.. मज़ा नहीं आ रहा है.. पहले कुछ खुराक-वुराक पिलाओ.. ताकि दिमाग़ ठीक से काम कर सके।
रॉनी ने नौकर को आवाज़ दी तो वो ठंडी बियर लेकर आ गया। अब सब बियर का मज़ा लेने लगे और बातों का दौर फिर शुरू हुआ।
पुनीत- अब बताओ टोनी क्या सोचा.. मेरी बात समझ में आई कि नहीं?
टोनी- हाँ तो सही है ना.. मैं बहुत पहले एक बार आ चुका हूँ और ये दोनों पहली बार आए हैं.. तो अबकी बार कुछ धमाल होना चाहिए।

विवेक और सुनील बस उनकी ‘हाँ’ में ‘हाँ’ मिला रहे थे।
सन्नी- तूने कुछ तो सोचा ही होगा टोनी.. इस बार के लिए वैसे भी तेरा शैतानी दिमाग़ कुछ ना कुछ सोचता रहता है।
टोनी- नहीं अभी कुछ सोचा तो नहीं है.. पर सोच लेते हैं और मेरा दिमाग़ कहाँ इतना फास्ट चलता है बड़े भाई.. आप भी कहाँ की बोल रहे हो..
रॉनी- साले ज़्यादा भोला मत बन.. तेरी सब हरकत हम जानते हैं। अब जो सोच कर आया है.. बता दे..

रॉनी की बात सुनकर एक बार तो टोनी को झटका लगा कि इनको प्लान के बारे में कैसे पता लगा.. मगर उसने बात को संभाल लिया।
टोनी- अच्छा बाबा माफ़ करो.. तुम ऐसे मानोगे तो है नहीं.. तो सुनो.. मेरा प्लान क्या है.. इस बार भी गर्लफ्रेण्ड ही लाएँगे.. मगर अबकी बार वर्जिन होंगीं.. समझे…
सन्नी- तू कहना क्या चाहता है?

टोनी- देखो बड़े भाई हर बार चुदी-चुदाई गर्लफ्रेण्ड को लाते हैं इस बार फ्रेश माल पटाओ.. उसको गेम के लिए राज़ी करो.. और यहाँ लेकर आओ.. तो मज़ा दुगुना हो जाएगा।
विवेक- हाँ.. ये आइडिया अच्छा है.. सील पैक लड़की होगी तो गेम खेलने में मज़ा ज़्यादा आएगा..
रॉनी- हम तो फ्रेश माल को पटा भी लेंगे.. तुम तीनों ला पाओगे?

टोनी- बस क्या गुरु.. हमको क्या समझा है.. टोनी नाम है मेरा.. जिस लड़की पर हाथ रख दूँ ना.. वो अपनी हो जाती है समझे..
पुनीत- अच्छा इतना भरोसा है खुद पर.. तो चल अब मेरा प्लान सुन..
टोनी- हाँ बताओ भाई.. सब अपना आइडिया दो.. जिसका आइडिया सबसे अच्छा होगा.. वही हम करेंगे..

पुनीत- मैं तुम्हें एक लड़की का नाम बताऊँगा.. अगर तुम उसको ले आओ तो इस बार इनाम की रकम 5 लाख होगी और गेम के रूल भी चेंज करेंगे।
टोनी- क्या बात है भाई.. 5 लाख.. अरे आप बोलो बस कौन है वो लड़की.. साली को चुटकियों में ले आऊँगा।


Quote

अपडेट  १४

अब तक आपने पढ़ा..

टोनी- हाँ बताओ भाई.. सब अपना आइडिया दो.. जिसका आइडिया सबसे अच्छा होगा.. वही हम करेंगे..
पुनीत- मैं तुम्हें एक लड़की का नाम बताऊँगा.. अगर तुम उसको ले आओ तो इस बार इनाम की रकम 5 लाख होगी और गेम के रूल भी चेंज करेंगे।
टोनी- क्या बात है भाई.. 5 लाख.. अरे आप बोलो बस कौन है वो लड़की.. साली को चुटकियों में ले आऊँगा।



अब आगे..

टोनी के अलावा बाकी सब समझ गए कि पुनीत किसका नाम लेगा.. सबकी दिल की धड़कन तेज़ हो गईं कि अब क्या होगा?
पुनीत- तेरी बहन कोमल को ला पाएगा तू?
पुनीत के इतना बोलते ही टोनी गुस्से में आग-बबूला हो गया और झटके से खड़ा हो गया- पुनीत ज़बान को लगाम दे अपनी.. साले तू पैसे वाला होगा.. तेरे घर का.. तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी बहन का नाम लेने की?

सन्नी- टोनी चुप रहो.. रूको एक मिनट मैं बात करता हूँ.. यार पुनीत ये क्या है.. तू कुछ भी बोल देता है। हम सब दोस्त हैं अगर ये मजाक था तो बहुत बुरा था.. चल सॉरी बोल..
पुनीत- सन्नी तुम होश में तो हो.. मैं पुनीत खन्ना हूँ.. मैं सॉरी बोलूँ? अरे इसकी बहन पर दिल आ गया मेरा.. इसको बोल 10 लाख दूँगा.. अब तो उसको अपना बना के ही रहूँगा..

इतना सुनते ही टोनी और ज़्यादा भड़क गया.. लड़ने की नौबत आ गई, बड़ी मुश्किल से विवेक और सुनील उसको बाहर लेकर गए।

इधर रॉनी ने पुनीत को काबू में किया- भाई आप को क्या हो गया है.. ऐसे लड़ना ठीक नहीं और उसके सामने बोलने की क्या जरूरत थी आपको.. वो लड़की चाहिए ना.. उसको तो कैसे भी आप पटा सकते हो..

पुनीत- नहीं रॉनी.. मैं इसका गुस्सा देखना चाहता था। अब तू देख ये खुद उसको यहाँ लाएगा.. खरीद लूँगा मैं इस कुत्ते को.. सन्नी जा उसको कीमत पूछ.. उसकी बहन की? मैं हर कीमत पर उसको यहाँ लाना चाहता हूँ। इसको किस बात पर इतना घमण्ड है.. बहुत बार ये मुझसे उलझ चुका है। मैं इसका घमण्ड तोड़ कर रहूँगा..

सन्नी- होश में आओ पुनीत.. ऐसा नहीं होता.. वो उसकी बहन है.. कोई रंडी नहीं.. जो तुम उसकी कीमत लगा रहे हो.. संभालो अपने आपको.. अब मैं उसको लेकर आता हूँ। ये बात दोबारा मुँह से मत निकालना.. वरना उनके साथ मैं भी चला जाऊँगा।

पुनीत कैसा भी हो.. सन्नी की बात मानता था, उसने ‘हाँ’ में सिर हिला दिया और सन्नी बाहर गया और टोनी को समझाने लगा।

सन्नी- अरे क्या हो गया तुझे.. तू पुनीत को जानता नहीं क्या.. पीने के बाद ऐसे ही बकवास करता है और रही तुम्हारी बहन की बात.. उसके बोलने से वो आ गई क्या? ऐसे लड़ना ठीक नहीं है यार!
टोनी- उसको अपने पैसों पर बहुत घमण्ड है ना.. साले को 2 मिनट में ठंडा कर सकता हूँ।
सुनील- बॉस आप शान्त हो जाओ और चलो यहाँ से.. अब यहाँ रुकने का कोई फायदा नहीं।
टोनी- नहीं अब उस कुत्ते को सबक़ सिखा कर ही जाऊँगा..
सन्नी- देख तू अन्दर चल.. पुनीत को मैं समझा दूँगा.. बस तू चुप रहना ओके..

टोनी भी गुस्से को काबू करके अन्दर आ गया। वैसे तो दोनों एक-दूसरे को देख कर आँखें दिखा रहे थे.. मगर कोई कुछ बोल नहीं रहा था।
सन्नी- हाँ तो फ्रेश माल लाने का प्लान सबको मंजूर है या किसी के दिमाग़ में कुछ और है..
रॉनी- मुझे यही ठीक लगता है.. इससे ज़्यादा क्या होगा?
टोनी- इससे भी ज़्यादा हो सकता है.. अब जब बात मुँह से निकल ही गई तो उसे पूरा भी कर ही लो।
सन्नी- मैं कुछ समझा नहीं.. तुम क्या कहना चाहते हो..
टोनी- पुनीत ने मेरी बहन पर गंदी नज़र मारी है.. तो इस बार सब अपनी बहनों को ही क्यों ना लेकर आएं..
रॉनी- टोनी कुत्ते.. तेरी ये मजाल तूने ऐसी बात सोची भी कैसे?

टोनी- क्यों जब पुनीत मेरी बहन के बारे में सोच सकता है तो बहन इसकी भी है.. उसको लाने में क्या दिक्कत है.. बड़ा घमण्ड है ना इसको अपने खिलाड़ी होने पर.. तो डर किस बात का.. ये तो हारेगा भी नहीं..
सन्नी- ये क्या बकवास है टोनी.. तुम ऐसा कैसे बोल सकते हो.. एक खेल के लिए हम अपनी बहन को लाएं.. इतने गिरे हुए नहीं हैं।

पुनीत- ओके मैं कुछ ज़्यादा बोल गया था.. तू टोनी अपनी बहन को मेरी बहन से मिला कर बड़ी ग़लती कर दी तूने.. अब देख मैं क्या करता हूँ।

टोनी- हाँ जानता हूँ… तू पैसे के दम पर मुझे मरवा देगा या मेरी बहन को उठा लेगा.. मगर इसमें तेरी जीत नहीं हार होगी.. अगर दम है तो खेल में मुझे जीत कर दिखा.. मैं कसम ख़ाता हूँ कि मेरी बहन को तेरे सामने लाकर खड़ा कर दूँगा.. मगर अगर तू हार गया तो तेरी बहन मेरी होगी.. बोल है मर्द तो कर मुकाबला.. नहीं तो दोबारा ऐसी बात मुँह से मत निकालना..

पुनीत गुस्से में पूरी बोतल एक सांस में पी गया।
रॉनी- भाई ये आपको फंसा रहा है आप कुछ मत बोलो.. मैं इस साले को अभी सीधा करता हूँ।
पुनीत- नहीं रॉनी नहीं.. अगर ऐसा है तो ऐसा ही सही.. इसका गुरूर मैं तोड़ कर ही रहूँगा.. मुझे हराने की हिम्मत किसी में नहीं.. अब तो ये खेल सिर्फ़ हम दोनों के बीच में होगा।
टोनी- हाँ ठीक है.. हम दोनों ही खेलेंगे अब तो फैसला हो ही जाए।

सन्नी- चुप रहो दोनों.. पुनीत मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है.. चलो मेरे साथ.. रॉनी तुम भी आओ मेरे साथ..
सन्नी ज़बरदस्ती दोनों को साथ ले गया इधर टोनी बियर का घूँट लेकर मुस्कुराने लगा।

विवेक- बॉस ये क्या हो गया.. हमने तो सोचा था कि हम पुनीत को इस बात के लिए रेडी करेंगे.. मगर साला वो तो खुद शुरू हो गया।
सुनील- लेकिन ये सन्नी काम बिगाड़ देगा साला.. बॉस आपको ऐसे गुस्सा नहीं होना चाहिए था।
टोनी- अबे चुप… साले फट्टू.. अगर मैं गुस्सा नहीं होता.. तो उनको शक हो जाता.. अब देख खेल का असली मज़ा।

उधर दूसरे कमरे में रॉनी गुस्सा हो रहा था।
रॉनी- भाई आप पागल हो गए हो क्या..? उस दो कौड़ी की लड़की के लिए हमारी बहन को दांव पर लगा रहे हो?

पुनीत- नहीं रॉनी.. मैं इतना पागल नहीं हूँ.. जो बहन को यहाँ लाऊँगा.. मैं बस उसके साथ गेम खेलूँगा और जीत भी मेरी होगी.. उसके बाद उसकी बहन को उसके सामने चोदूँगा.. तब जाकर मेरा गुस्सा ठंडा होगा।
सन्नी- पागल हो तुम.. अगर ग़लती से वो जीत गया.. तो क्या करोगे?
पुनीत- ना मुमकिन है ये.. मुझे वो नहीं हरा सकता..
रॉनी- भाई पत्तों का गेम है.. सब लक पर चलता है..
पुनीत- ठीक है अगर मैं हार भी गया तो क्या.. साले का मुँह पैसों से बन्द कर दूँगा.. अपनी बहन थोड़े ही उस कुत्ते को दूँगा..

सन्नी- पुनीत, वो कोई बच्चा नहीं है.. जो मान जाएगा.. मैंने कल रॉनी को कहा था कि इस बार वो कोई गेम खेलेगा.. और देखो उसने गेम में तुम्हें फँसा लिया। अरे कोमल का यहाँ आना कोई इत्तफ़ाक़ नहीं है.. वो प्लान करके उसको यहाँ लाया है.. तुम मेरी बात सुनो.. सब समझ जाओगे..
रॉनी- क्या बात कर रहे हो.. ये बात रात को क्यों नहीं बताई?

सन्नी- रात को मुझे खुद नहीं पता था कि इसका ये प्लान है.. अब सुनो रात को मैं बुलबुल के पास था.. वहाँ इसको देख कर शक हुआ.. तो मैंने छुप कर इसका पीछा किया। इसने बुलबुल को बुक किया.. फिर फ़ोन पर किसी से बात की कि काम हो गया.. अब कल देखना असली तमाशा.. उसके बाद ये सलीम गंजा से मिला और हंसों को जमा करने और पार्टी में पाउडर लाने का काम उसको दिया.. तभी मुझे शक हुआ कि कहीं कुछ गड़बड़ है और मैंने रॉनी को फ़ोन करके बता दिया।

पुनीत- नहीं नहीं.. उन सब बातों का इस बात से कोई लेना-देना नहीं.. वो क्यों अपनी बहन को यहाँ लाएगा.. ये सब इत्तफाक ही है और शुरूआत मैंने की.. उसने नहीं.. तो ये बात मानने वाली नहीं है।

रॉनी- चलो मान लिया.. कि ये बात अलग है.. मगर आप आगे उसकी ऐसी कोई बात ना मान लेना.. बस ये गेम किसी तरह क्लोज़ करो.. बहन यहाँ नहीं आएगी.. ओके.. अगर वो आपके रूल ना माने.. तो आप उसको मना कर देना।
पुनीत- मानेगा कैसे नहीं.. साले को मानना पड़ेगा.. अब चलो..

कुछ देर बाद सब उसी जगह बैठे थे। अब टोनी कुछ शान्त हो गया था.. उसके हाथ में बोतल थी और बियर के एक घूँट के साथ उसने बात शुरू की।
टोनी- क्यों पुनीत.. क्या सोचा.. गेम खेलना है.. या हार मान ली?



Quote

अपडेट  १५

अब तक आपने पढ़ा..

कुछ देर बाद सब उसी जगह बैठे थे। अब टोनी कुछ शान्त हो गया था.. उसके हाथ में बोतल थी और बियर के एक घूँट के साथ उसने बात शुरू की।
टोनी- क्यों पुनीत.. क्या सोचा.. गेम खेलना है.. या हार मान ली?



अब आगे..

पुनीत- तेरे जैसे कुत्ते से मैं हार जाऊँ.. यह हो नहीं सकता.. अब सुन, यह गेम आज ही हम दोनों के बीच खेला जाएगा, 7 राउंड होंगे.. जो 4 जीत गया वो विनर.. उसके बाद जो होना है वही होगा.. तू समझ गया ना?

टोनी- वाह वाह.. क्या चाल चली है भाई.. आज तक तो लड़कियाँ साथ लेकर खेलते थे.. अब यह रूल चेंज क्यों? अगर गेम खेलना है तो उसी तरह खेलो.. एक तरफ़ मेरी बहन होगी दूसरी तरफ तेरी.. उसके बाद खेल शुरू होगा.. हाँ अगर तुझे पास में ये पब्लिक नहीं चाहिए तो मुझे कोई हर्ज नहीं.. मगर खेल ऐसे ही खेलेंगे।

टोनी की बात से रॉनी को बड़ा गुस्सा आ रहा था.. मगर सन्नी ने उसके हाथ को दबा कर उसको चुप रहने का इशारा किया।

पुनीत- नहीं ऐसा नहीं हो सकता.. वो मेरी बहन है.. ऐसे कैसे इस गेम के लिए उसको तैयार करूँ?
टोनी- यही बात तेरे मुँह से सुनना था.. अरे तू हार गया.. तो बाद में कैसे तैयार करेगा.. देख तेरे दिल में कुछ धोखा देने की बात है.. तो उसको निकाल दे.. गेम होगा तो पुराने रूल से ही होगा.. वरना मैं समझूँगा तेरे में दम नहीं.. कि तू मुझसे मुकाबला करे!

पुनीत को बहुत ज़्यादा गुस्सा आ गया, उसने बियर की आधी बोतल एक सांस में गटक ली।

पुनीत- चुप कुत्ते.. अब मेरी सुन गेम होगा और पुराने तरीके से ही होगा.. अब हम दोनों नहीं.. ये चारों भी हारने वाली लड़की को चोदेंगे.. बोल है तेरे को मंजूर?

रॉनी और सन्नी तो बस एक-दूसरे को देखने लगे कि यह पुनीत ने क्या कह दिया.. वो कुछ बोलते इसके पहले टोनी ने ‘हाँ’ कह दी।
टोनी- ठीक है.. ऐसा ही सही अब बात ज़ुबान की है.. तो मैं पीछे नहीं हटूँगा। किसी भी तरह मेरी बहन को मना लूँगा, बोल कब लाना है.. समय तू ही बता दे.. बाद में यह ना कहना कि तेरी बहन नहीं मान रही थी.. हा हा हा हा.. जरा सोच समझ कर बताना।

पुनीत- नहीं.. मैंने जो बोल दिया वो बोल दिया.. अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं पैदा होता।
रॉनी- रूको.. तुम दोनों पागल हो गए हो.. मुझे यह बात मंजूर नहीं.. मेरी बहन इस गंदे खेल का हिस्सा नहीं बनेगी.. बस..

पुनीत- क्या बकवास कर रहा है.. मैंने बोल दिया ना और वो सिर्फ़ तेरी बहन नहीं.. मेरी भी है.. तू डर मत.. हम जीतेंगे और इसकी बहन को इसके सामने नंगा करेंगे।
टोनी- वो तो समय ही बताएगा.. कौन किसको नंगा करता है.. बोल गेम कब शुरू होगा?
पुनीत- देख बहन को मना कर लाना आसान काम नहीं है.. कुछ दिन तो लग ही जाएँगे.. समय हम बाद में तय कर लेंगे.. ओके..
टोनी- ठीक है.. मगर बस 10 दिन का समय होगा.. उस दौरान तू अपनी बहन को पटा कर लाएगा.. नहीं तो तू हार जाएगा.. ओके..
पुनीत- ठीक है साले.. मगर तू भी याद रखना.. अगर तू ना पटा पाया.. तो क्या होगा..
टोनी- मेरी फिकर मत कर.. मुझे पता है.. मुझे किस तरह पटाना है।

सन्नी और रॉनी बस बेबस से अपने आप को कोस रहे थे कि पुनीत ने यह क्या कर डाला.. देर शाम तक वो सब वहीं बैठे बकवास करते रहे।
सन्नी- अरे यार शाम होने को आई है.. मीटिंग तो ओवर हो गई.. अब क्या इरादा है?
पुनीत- इरादा तो बहुत कुछ है.. मगर आज मूड दूसरा हो गया.. तुम लोग जाओ.. हम सुबह आ जाएँगे..
टोनी- ठीक है यार.. अब जाने में ही भलाई है.. वरना पुनीत कहीं अपनी बात से मुकर ना जाए।
पुनीत- कुत्ते.. ये किसी ऐरे-गैरे की ज़ुबान नहीं.. पुनीत खन्ना की ज़ुबान है तू अपना संभाल..

विवेक- तुम हमारे साथ आ जाओ टोनी.. सन्नी तो अपनी कार से जाएगा।
सन्नी- हाँ तुम निकल जाओ.. मैं बाद में आता हूँ ओके..

वो तीनों वहाँ से निकल गए और सन्नी और रॉनी गेट के बाहर तक उनको छोड़ने आए।
काफ़ी देर तक सन्नी और रॉनी बाहर खड़े बातें करते रहे.. उसके बाद अन्दर आ गए।
पुनीत- रॉनी मेरे भाई.. यहाँ आओ.. यार मुझसे ऐसे नाराज़ मत हो।

रॉनी- भाई ये आपने क्या कर दिया.. आप उस टोनी की बातों में आ गए.. अब क्या होगा? हमारी बहन को आप यहा इस गंदे गेम का हिस्सा बनाओगे? अरे वो कितनी स्वीट है.. मासूम है!

पुनीत- चल हट.. तू मुझे पागल समझता है क्या.. उस कुत्ते को मैंने अपने जाल में फँसा लिया है। वो कौन सा हमारी बहन को जानता है.. हम किसी और को बहन बना कर लाएँगे।
रॉनी- ओह्ह वाउ.. भाई मान गया आपके दिमाग़ को.. आप तो बहुत माइंडेड हो.. अब उस कुत्ते की बहन को सबके सामने नंगा करेंगे।
सन्नी- यार सच्ची पुनीत.. तेरे दिमाग़ को मान गया.. साले शैतान को भी पीछे छोड़ दिया। वैसे बहन का रोल देगा किसे?
रॉनी- भाई मुनिया कैसी रहेगी.. वो उमर में भी छोटी है और माल भी मस्त है.. टोनी तो उसको देखते ही लट्टू हो जाएगा..

पुनीत- नहीं यार मुनिया गाँव की गोरी है.. साला कुत्ता.. उसको तुरंत पकड़ लेगा। अब उसको ये तो पता है ना हमारी बहन गुड्डी कॉलेज में है और मुनिया ठहरी अनपढ़… सारा गेम खराब हो जाएगा।
रॉनी- तो अब क्या करेंगे भाई.. किसको गुड्डी की जगह लेकर आएँगे?
पुनीत- इसकी फिकर ना कर.. दिल्ली जाकर किसी ना किसी को ढूँढ ही लेंगे.. आज मुनिया को ठीक से चोद कर कल निकल जाएँगे.. ठीक है ना..

सन्नी- यार ये मुनिया कौन है?
रॉनी- अरे एक कच्ची कली है यार.. आज ही उसका मुहूरत किया है.. साली बड़ा मज़ा देती है।
पुनीत- उसकी चूत इतनी टाइट है क्या बताऊँ.. साला लंड अन्दर जाते ही ऐसा महसूस करता है कि किसी भट्टी में फँस गया हो।
सन्नी- अरे यार मेरा तो सुनकर ही ये हाल हो गया.. कहाँ है वो.. रूप की रानी.. काम की देवी?
पुनीत- अरे नहीं यार सन्नी.. वो ऐसी लड़की नहीं है.. बड़ी मुश्किल हम दोनों से चुदी है। अब तेरे बारे में बात करूँगा तो गड़बड़ हो जाएगी।

सन्नी- अरे क्या मेरे यार.. मुझे इतना गिरा हुआ समझा है क्या.. जो तेरे माल पर हाथ साफ करूँगा.. बस दिखा दे एक बार.. पता तो लगे ये कामदेवी कैसी है?
पुनीत- ठीक है रुक.. अभी दिखाता हूँ मेरी सोने की चिड़िया को..
इतना कहकर पुनीत कमरे में गया उस वक़्त मुनिया नहा कर कपड़े पहन रही थी।

पुनीत- हाय मेरी जान बहुत सोई रे तू.. अब नहा कर एकदम मस्त लग रही है। आज पूरी रात मज़ा लेंगे हम दोनों.. क्यों क्या बोलती है..?
मुनिया- आप भी ना ऐसे ही चले आते हो.. कपड़े तो पहने दो मुझे और आज कुछ नहीं होगा.. मेरी तबीयत ठीक नहीं है जी..
पुनीत- अरे मेरी भोली मुनिया.. मेरे सामने नंगी हो चुकी है.. अब कैसी शर्म? पहन लिए ना अब कपड़े और शुरू में थोड़ा दर्द होता है.. उसके बाद बड़ा मज़ा आता है।

मुनिया- नहीं बाबूजी.. रॉनी जी ने बहुत ज़ोर से किया.. मुझे नीचे बहुत दर्द हो रहा है।

पुनीत- अच्छा जाने दे.. ये बात बाद में कर लेंगे.. मेरा एक दोस्त आया है.. चल तुझे उससे मिलवाता हूँ.. प्यार से बात करना.. हाँ.. वो मेरा खास दोस्त है.. कहीं वो नाराज़ ना हो जाए..

मुनिया- नहीं नहीं बाबूजी.. मैं कोई वेश्या नहीं हूँ.. जो आप सबके सामने मुझे भेज रहे हो.. मैंने आपको अपना माना.. आपके कहने पर आपके भाई को भी मैंने बर्दाश्त किया.. मगर अब और नहीं बस..
मुनिया के बोलने का तरीका उसकी आँखों में गुस्सा देख कर एक बार तो पुनीत भी घबरा गया।

पुनीत- अरे पगली.. तू गलत समझ रही है.. मैंने कब कहा तुझे ऐसस? तू बस उससे मिल ले.. वो कुछ ऐसा-वैसा नहीं करेगा.. ठीक है ना..
मुनिया- ठीक है बाबूजी.. आप जाओ.. मैं अभी आती हूँ।

पुनीत बाहर आ गया और सन्नी को कहा- साली गुस्सा हो गई.. अब आ रही है.. देख लेना यार कुछ कहना मत.. नहीं तो साली रात को चुदवाएगी नहीं..
सन्नी- अरे गाँव की होकर साली के इतने नखरे.. चल आने तो दे.. मैं भी देखूँ.. कौन है ये मुनिया मस्तानी?

मुनिया ने लाइट ब्लू सलवार सूट पहना हुआ था.. उसके बाल खुले थे.. जिसमें वो अप्सरा जैसी लग रही थी। जैसे ही मुनिया और सन्नी की नजरें मिलीं.. दोनों ही एक-दूसरे में खो गए.. मुनिया धीरे-धीरे सन्नी के पास आकर खड़ी हो गई।
मुनिया- नमस्ते बाबूजी..

सन्नी कुछ नहीं बोला.. बस मुनिया को घूरता रहा।
पुनीत- अरे कहाँ खो गया सन्नी.. ये है मुनिया.. देख लो..
सन्नी- अह.. ह.. हाँ अच्छी है.. मुझे ऐसा क्यों लगता है.. कि मैंने तुम्हें पहले भी कहीं देखा है..



Quote

अपडेट  १६

अब तक आपने पढ़ा..

मुनिया ने लाइट ब्लू सलवार सूट पहना हुआ था.. उसके बाल खुले थे.. जिसमें वो अप्सरा जैसी लग रही थी। जैसे ही मुनिया और सन्नी की नजरें मिलीं.. दोनों ही एक-दूसरे में खो गए.. मुनिया धीरे-धीरे सन्नी के पास आकर खड़ी हो गई।
मुनिया- नमस्ते बाबूजी..
सन्नी कुछ नहीं बोला.. बस मुनिया को घूरता रहा।
पुनीत- अरे कहाँ खो गया सन्नी.. ये है मुनिया.. देख लो..
सन्नी- अह.. ह.. हाँ अच्छी है.. मुझे ऐसा क्यों लगता है.. कि मैंने तुम्हें पहले भी कहीं देखा है?



अब आगे..

मुनिया- क्या बाबूजी.. आप भी कैसा मजाक करते हो.. मैं अपने गाँव से कभी बाहर ही नहीं निकली.. आपने कहाँ देख लिया मुझे?
सन्नी- ना ना शहर में नहीं.. मैंने गाँव में ही देखा है तुझे.. यार कहाँ देखा है ये समझ नहीं आ रहा.. लेकिन देखा है मैंने!
रॉनी- अरे क्या सन्नी भाई.. ये गाँव की गोरी है.. आप शहर के नुस्खे ना आजमाओ.. हा हा हा.. ये नहीं पटने वाली..

पुनीत भी हँसने लगा और मुनिया भी हँसती हुई वापस अन्दर चली गई, मगर सन्नी वैसे ही खड़ा बस सोचता रहा।

लो दोस्तो, अब ये क्या हो रहा है.. ये गुड्डी कौन है.. इसकी एंट्री भी जल्दी होगी और ये सन्नी को मुनिया के बारे में क्या याद आ गया। अब ये सब तो पता लग ही जाएगा.. सोचते रहो और आगे कहानी का आनन्द लेते रहो।

रॉनी और पुनीत अब भी हंस रहे थे मगर सन्नी चुपचाप खड़ा हुआ बस उस कमरे की ओर देख रहा था.. जिसमें मुनिया गई थी..
रॉनी- अरे सन्नी क्या हुआ.. बहुत पसन्द आ गई क्या.. बोलो.. तब तो आज रात यहीं रुक जाओ.. तुमको भी इसका रस पिलवा देंगे.. हा हा हा हा..
पुनीत- अरे नहीं रे.. वो नहीं मानेगी साली.. आज के लिए तो मेरे को ही मना कर रही है।
रॉनी- उस अनपढ़ गंवार को मनाना कौन सा मुश्किल है भाई?
सन्नी- चुप रहो यार.. दोनों मेरी बात को मजाक में मत लो.. ये मुनिया को मैं जानता हूँ.. कुछ तो है साला.. याद नहीं आ रहा.. मगर देख लेना मैं बता दूँगा.. इसको मैं जानता हूँ। अब तुम ही चोदो इसको.. मुझे एक काम है.. अभी मेरा जाना जरूरी है।
पुनीत- ठीक है जाओ.. और याद आ जाए तो मुझे भी बता देना.. कि मुनिया कौन है.. हा हा हा..

सन्नी के जाने के बाद रॉनी अपने कमरे में चला गया और पुनीत नौकरों को कुछ खाना बनाने को बोल कर मुनिया के पास चला गया।
मुनिया- पुनीत बाबू.. ये आपके दोस्त क्या बोल रहे थे.. इन्होंने मुझे कहाँ देखा है?
पुनीत- अरे तेरी जवानी देख कर उसका मन बहक गया था.. बस ऐसे ही बोल रहा था.. वैसे तू है बड़ी क़यामत.. यार आज पूरी रात मेरे साथ बिता ले.. मैं तेरी लाइफ बना दूँगा..

मुनिया- नहीं नहीं बाबूजी.. सच्ची आज मेरी ‘वो’ बहुत दर्द कर रही है.. कल कर लेना.. आज नहीं..
पुनीत- अरे ‘वो’ क्या दर्द कर रही है.. साफ-साफ बोल ना.. उसको चूत कहते हैं और मेरे हथियार को लौड़ा बोला कर..
मुनिया- छी: बाबूजी.. आप बड़े बेशर्म हो.. मुझसे नहीं बोला जाएगा..
पुनीत- अरे मेरी जान.. नाम लेगी तो ज़्यादा मज़ा आएगा.. चल यहाँ मेरे पास बैठ और बता..

पुनीत ने मुनिया को अपने से चिपका कर बैठा लिया और उसके मम्मों को हल्के से दबा कर उसको पूछा।
पुनीत- तेरे इन चूचों में भी दर्द है क्या.. मेरी जान?
मुनिया- हाँ बाबूजी.. थोड़ा इनमें भी है.. आह्ह.. दबाओ मत.. दुःखता है।

पुनीत ने ज़ोर से दबाते हुआ कहा- इनका नाम बोल.. नहीं ऐसे ही दबाता रहूँगा और दर्द करता रहूँगा।
मुनिया- आह्ह.. बाबूजी.. उफ़फ्फ़.. मेरे चूचे मत दबाओ ना.. आहह..
पुनीत- यह हुई ना बात.. अब तू अपने हर अंग का नाम बताएगी.. तभी मुझे सुकून मिलेगा.. ठीक है..

मुनिया- आह्ह.. बाबूजी.. आप तो ससस्स बेशर्म हो.. मुझे भी ऐसा ही बना दोगे.. आह्ह.. अब आप मानोगे नहीं.. ओह.. मेरे चूचों पर रहम करो.. और आह्ह.. मेरी चूत को सहलाओ.. आह्ह.. आपके मोटे लौड़े ने मेरी चूत को सुजा कर रख दिया है आह..
पुनीत- ओह.. मार डाला रे.. मेरी मुनिया.. ये हुई ना बात.. अब लगा कि तू मेरी रानी है। चल मुझे दिखा तेरी चूत.. मैं उसको अपनी जीभ से चाट कर आराम दिए देता हूँ।

मुनिया- अभी नहीं.. रात को दिखाऊँगी.. अभी मुझे जोरों की भूख लगी है.. कुछ खाने के बाद आप देख लेना.. ठीक है..
पुनीत- अरे मेरी जान.. मैं हूँ ना.. मुझे खाले.. इससे ज़्यादा अच्छा खाना तुझे कहाँ मिलेगा.. हा हा हा..
मुनिया- नहीं बाबूजी.. मुझे माँस खाना पसन्द नहीं.. मैं तो सब्जी ही खाऊँगी.. अब आप जाओ.. रात को आ जाना.. मुझे भी रसोई में जाने दो..

पुनीत मस्ती के मूड में था.. मगर मुनिया जल्दी से वहाँ से निकल कर रसोई में चली गई और पुनीत कुछ ना कर सका।

दोस्तो, उम्मीद है.. आपको कहानी में मज़ा आ रहा है। अब मुनिया तो गई चलो टोनी के पास चलते हैं। वहाँ क्या हो रहा है.. अभी ये भी जान लो।

सुनील- बॉस अपने तो कमाल कर दिया.. एक बार तो मैं डर ही गया था कि सारा प्लान चौपट हो गया।
विवेक- अरे ऐसे-कैसे चौपट हो जाता.. बॉस पर मुझे पूरा भरोसा था.. मगर एक बात अभी भी समझ के बाहर है बॉस?
टोनी- कौन सी बात.. तेरी समझ के बाहर है रे.. चल बता?
विवेक- बॉस हमने तो उसकी बहन को देखा भी नहीं है.. कहीं वो भी हमारी तरह नकली बहन ले आया तो?

टोनी- हा हा हा तुम दोनों मुझे क्या समझते हो.. मैंने कच्ची गोली नहीं खेली हैं। तुम दोनों ने क्या मैंने भी अब तक उसकी बहन को नहीं देखा है.. मगर ये खेल का असली विलेन तो उसकी बहन को जानता है ना..

विवेक और सुनील दोनों एक साथ चौंक उठे और एक ही सुर में बोले- ये असली विलेन कौन है बॉस?
टोनी- अरे चौंको मत.. मेरे दोस्तो.. ये काम में उसके लिए ही कर रहा हूँ। अब वो क्या चाहता है.. ये तो पता नहीं मगर गेम कुछ बड़ा है.. इतना मैं समझ गया हूँ।

सुनील- बॉस हम तो समझ रहे थे.. कि ये आपकी दुश्मनी का खेल है.. मगर ये तो पहेली उलझती ही जा रही है.. एक चूत के लिए इतना पंगा?

टोनी- अरे दोस्तो, तुम नहीं समझोगे दुनिया में छोटी सी चूत बड़ी-बड़ी तबाही मचा देती है.. भाई को भाई से लड़वा देती है.. ये चूत सिर्फ़ चूत नहीं.. बल्कि ये चूत एक पहेली होती है.. समझे.. जिसने इसको सुलझा दिया.. वो दुनिया का सबसे अकलमंद आदमी होता है।

विवेक- बॉस जो भी हो.. हमें तो पैसे से मतलब है.. अब देखो ना हम जैसे कंगलों को आपने इतनी बड़ी पार्टी में घुसाया.. गेम खेला और जीत कर चूत के गेम के दावेदार बने। अब तो बस मज़ा ही मज़ा है। आज तक रण्डियों को ही चोदा है.. अब किसी शरीफजादी को चोदने का मौका मिलेगा।
सुनील- बॉस आपने बताया नहीं कि कोमल को कहाँ छोड़ा आपने?

टोनी- इसमें क्या बड़ी बात है.. टैक्सी को दूर खड़ा करके आया था। बस पुनीत को उसकी क़ातिल जवानी दिखा कर वापस टैक्सी में छोड़ आया और खुद गाड़ी को इधर-उधर घुमा कर समय पास किया और वापस आ गया समझे..
सुनील- आपका दिमाग़ बहुत चलता है.. इसलिए आप हमारे बॉस हो.. अब आगे क्या करना है?

टोनी कुछ बोलता उसके पहले उसका फ़ोन बजने लगा।
टोनी- हैलो भाई कैसे याद किया.. काम हो गया.. मैंने उसको बातों में फँसा लिया। अब उसकी बहन गेम में आएगी और हम उसको नंगा कर देंगे। आप बस नजारा देखो अब..
भाई- ओह्ह.. रियली.. ये हुई ना बात.. अब आगे क्या करना है.. पता है ना?
टोनी- नहीं भाई.. आपने कहा था.. पहले पुनीत और रॉनी को जाल में फँसाओ.. उसके बाद आगे का प्लान बताऊँगा।
भाई- हाँ याद है.. तू पहले ये बता वहाँ क्या हुआ था?
टोनी ने सारी बात भाई को बताई.. जिसे सुनकर वो खुश हो गया।

भाई- अब सुन तेरे फ़ोन में मैसेज भेज रहा हूँ.. ये एक जगह का पता है.. तू कल वहाँ चला जा..
काफ़ी देर तक भाई बोलता रहा और टोनी बस चुपचाप सुनता रहा।

टोनी- वाह भाई मान गया.. आप तो मेरे दिमाग़ को पढ़ लेते हो.. मुझे भी यही शक था कि साला कोई नकली बहन ना ले आए.. अब देखता हूँ साला कैसे बचाता है.. अपनी बहन को.. मैं ठीक समय पर वहाँ पहुँच जाऊँगा।



1 user likes this post mukesh shah
Quote

Keep it up very interesting sexy story mast erect my cock

Quote

(27-02-2018, 01:58 PM)mukesh shah : Keep it up very interesting sexy story mast erect my cock

Thankyou keep reading...

Quote

अपडेट  १७

अब तक आपने पढ़ा..

टोनी- वाह भाई मान गया.. आप तो मेरे दिमाग़ को पढ़ लेते हो.. मुझे भी यही शक था कि साला कोई नकली बहन ना ले आए.. अब देखता हूँ साला कैसे बचाता है.. अपनी बहन को.. मैं ठीक समय पर वहाँ पहुँच जाऊँगा।


अब आगे..

दोस्तो, कुछ लोगों की शिकायत भरे ईमेल आए कि कहानी बहुत उलझी हुई है.. उनके कुछ सवाल हैं जिसका जबाव वो चाहते हैं तो आइए कहानी को थोड़ा पीछे ले जाकर आपको ये सब बता देती हूँ ताकि आपकी कुछ उलझन कम हो जाए।
आज के दिन से कुछ दिन पहले की बात है.. जब इस साजिश का जन्म हुआ था।

टोनी एक ऐय्याश किस्म का लड़का है.. बड़े घर के लड़कों के साथ इसकी दोस्ती है.. तो शराब-कबाब सब इसको आराम से मिल जाता है.. क्लब में जाना.. वहाँ गेम खेलना.. सब काम में आगे है और वहीं रॉनी और पुनीत से इसकी दोस्ती हो गई। सन्नी भी इनका साथी है और भी कुछ लड़के हैं ये सब दोस्त हैं।

मगर टोनी और पुनीत की ज़्यादा नहीं बनती.. हर बार किसी ना किसी बात पर लड़ते ही रहते हैं। अब पुनीत और रॉनी का दुश्मन.. जिसे भाई के नाम से आप जानते हो.. उसने मौके का फायदा उठा कर टोनी को फ़ोन किया। उसको पैसों का लालच देकर इन दोनों भाइयों के खिलाफ खड़ा कर लिया.. बाकी सुनील और विवेक के बारे में तो आप जानते ही हो। ये दोनों आवारा लड़के हैं और छोटी-मोटी चोरियां भी करते हैं और टोनी के चमचे हैं। तो बस टोनी ने इनका सहारा ले लिया। आगे जो चल रहा है.. आप सबको पता ही है.. तो चलो अब उलझन दूर हुई ना.. अब आप लोग आगे की कहानी पर ध्यान दीजिएगा।

फ़ोन रखने के बाद टोनी ने उन दोनों को मुस्कुरा कर देखा.. उनके चेहरे भी चमक गए।
विवेक- क्या हुआ.. भाई ने क्या कहा?

टोनी- अरे ये देख.. कल इस जगह हमें जाना है.. वो चिड़िया कल यहीं मिलेगी और वो दोनों हरामी भी वहीं अपनी बहन के साथ होंगे.. तब हम आराम से उसको पहचान लेंगे।
विवेक- मगर बॉस वो वहाँ आएँगे कैसे.. वो दोनों तो फार्म पर हैं ना.. और उनको वहाँ भेजेगा कौन?
टोनी- अरे कुत्तों.. ये भाई ऐसी-वैसी चीज नहीं है.. वो कल के लिए कोई ना कोई जुगाड़ लगा ही लेगा..

सुनील- वाह.. बॉस ये भाई तो बड़ा माइंडेड है.. कैसे सब प्लान बना लेता है..? अब उसकी बहन नहीं बचने वाली है.. बस कल सब काम ठीक से हो जाए।
टोनी- अरे सब ठीक ही होगा.. चलो अब कुछ खाने का बंदोबस्त करो.. बहुत जोरों की भूख लगी है।
लो यहाँ तो खाना शुरू हो गया.. अब यहाँ रहकर क्या फायदा.. तो आगे ही चलते हैं.. शायद कुछ मिल जाए।

उधर रॉनी अपने कमरे में बैठा हुआ था तभी पुनीत वहाँ आ गया।
रॉनी- आओ भाई.. कहाँ रह गए थे.. अब क्या सोचा आपने.. हम तो एक हफ्ते के लिए यहाँ आए थे.. मगर आपके गेम के चक्कर में अपन को कल ही जाना पड़ेगा।
पुनीत- अरे अब करें भी तो क्या करें.. बात ज़ुबान की आ गई है.. कल जाकर किसी लड़की को तलाश करते हैं जिसे टोनी ना जानता हो।
रॉनी- हाँ ये बात तो है.. सन्नी को पूछें शायद वो कुछ जुगाड़ जमा दे।
पुनीत- हाँ ये सही रहेगा.. उसका दिमाग़ हमसे ज़्यादा चलता है.. वो कोई ना कोई जुगाड़ लगा ही देगा।

रॉनी ने सन्नी को फ़ोन लगाया और ये बात बताई।
सन्नी- ऐसी लड़की जिसको टोनी ना जानता हो.. बहुत हैं मगर वो ऐसा गेम खेलने के लिए राज़ी होगी.. ये थोड़ा मुश्किल है यार..
रॉनी- अरे यार लड़की को मनाना हमारा काम है.. तुम बस किसी लड़की का जुगाड़ करो।

सन्नी- ठीक है.. करता हूँ.. तुम आओ तो सही.. यहाँ आकर बात करेंगे मगर एक बात का ख्याल रहे.. टोनी बहुत हरामी है.. उसको ज़रा भी भनक ना लगने पाए.. इसलिए तुम दोनों अपनी बहन को अपने साथ कहीं मत ले जाना। अगर टोनी या उसके किसी चमचे ने गुड्डी को देख लिया तो सब प्लान चौपट हो जाएगा।

रॉनी- अरे इसकी फिकर मत करो.. वैसे भी गुड्डी को बहुत कम लोग जानते हैं। वो कहीं आती-जाती तो है नहीं.. बस अपनी पढ़ाई से मतलब रखती है।

सन्नी- तब ठीक है.. अब उस टोनी का काम तमाम हो गया समझो.. तुम दोनों आ जाओ.. लड़की हम ढूंढ लेंगे.. मगर फिर भी सावधानी के लिए मुझे टोनी पर नज़र रखनी होगी।
रॉनी- हाँ ये ठीक रहेगा.. तुम उस पर नज़र रखो.. हम कल आ रहे हैं बाकी बातें वहीं आकर करेंगे।

पुनीत- गुड्डी को टोनी ने कभी नहीं देखा और ना कभी देख पाएगा क्योंकि पापा कितने सख़्त मिज़ाज हैं गुड्डी को लेकर उस बेचारी को किसी फ्रेण्ड तक के साथ अकेली बाहर जाने की इजाज़त नहीं है। हमारे पड़ोसी तक गुड्डी को नहीं पहचानते.. तो वो कुत्ता क्या खाक जान पाएगा।
रॉनी- अरे यार वो सख़्त इसलिए हैं कि गुड्डी को बहुत प्यार करते हैं। याद है एक बार गुड्डी के पैर में हल्की सी मोच आ गई थी। कैसे पूरे घर में हंगामा मचा दिया था।

पुनीत- हाँ सब याद है.. चल यार भूख लगी है.. खाना खा ही लेते हैं। उसके बाद दोनों मिलकर मुनिया का गेम बजाएँगे।
रॉनी- अरे खाना ऐसे ही खाओगे क्या.. पहले कुछ पीना हो जाए?
पुनीत- सुबह से पी ही रहे हैं चल आ जा.. अब खाना ही खाएँगे.. बड़ी भूख लगी है।
दोस्तों इनको खाने दो.. हम थोड़ा घूम कर आते हैं।

हॉस्टल में रात को सभी लड़कियाँ खाना खाने के बाद अपने कमरों में बैठी बातें कर रही थीं।

पूजा- अरे यार तू दिखने में तो बड़ी स्टाइलिश है.. मगर सेक्स से इतनी दूर क्यों रहती है?
पायल- अरे में कोई गाँव की थोड़ी हूँ.. जो स्टायल में नहीं रहूँगी.. बस ये सेक्स मुझे पसन्द नहीं..
पूजा- अरे आजकल तो ये फैशन बन गया है.. लड़की जब तक एक आध ब्वॉय-फ्रेण्ड ना बनाए.. उसको शक की निगाह से देखा जाता है कि कहीं ये लेसबो तो नहीं.. मगर तू तो वो भी नहीं है..

पायल- अरे ये सब बकवास बात है.. लड़के बस मज़े लेकर लड़की को छोड़ देते हैं उनको तो बस तड़पाओ.. मगर घास ना डालो..
पूजा- अरे तू तो हर बात को उल्टा ही बोलेगी.. कभी किसी को देखा है सेक्स करते हुए.. कितना मज़ा आता है उसमें.. तू क्या जाने?
पायल- बस बस.. तू क्या समझती है.. मुझे कुछ पता नहीं.. अरे मैं इन सब से दूर रहती हूँ… तो क्या हुआ.. जानकारी सब है मुझे..
पूजा- हा हा हा.. आजकल नेट के जमाने में जानकारी तो बच्चे को भी हो जाती है.. तूने कौन सा तीर मार लिया।
पायल- अरे तूने जब सोचा भी नहीं होगा.. तब मैंने लाइव सेक्स देख लिया था और तब से मुझे सेक्स से नफ़रत हो गई।

पायल जोश में बोल तो गई.. मगर जब उसको ख्याल आया कि वो यह क्या बोल गई.. तब उसके चेहरे पर परेशानी के भाव आ गए और वो चुप हो गई।

पूजा- ओये होये.. मेरी भोली पायल.. तूने कब और क्या देख लिया.. बता ना यार.. इतने साल पहले किसे देखा.. बता ना यार.. मुझे जानना है..
पायल- नहीं किसी को नहीं देखा.. बस ऐसे ही मुँह से निकल गया.. सच्ची..
पूजा- बस यार ये नाटक मत कर.. मुझे पता है तूने अपने मॉम-डैड को ही देखा होगा.. इतने साल पहले.. तो वही देख सकती है। मैंने भी बहुत देखा है अपनी मॉम को डैड से चुदवाते हुए.. उनकी फिल्म देख कर ही तो मैं सब सीखी हूँ।
पायल- चल हट.. कुछ भी बकवास करती है.. मैंने ऐसा कुछ नहीं देखा। अब दूसरी बात कर..
पूजा- अरे यार.. अब बता भी दे.. इसमें शरमाना कैसा और तुझे सेक्स से नफ़रत क्यों हो गई.. बता ना यार?

पायल- ठीक है बताती हूँ.. मगर किसी को कहना मत तू.. प्लीज़ यह मेरे घर की बात है।
पूजा- अरे पागल है क्या.. मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगी.. चल अब बता..

पायल- ये बहुत साल पहले की बात है जब मैं छोटी थी.. तो एक रात मेरे सर में बड़ा दर्द हो रहा था। मैं अपने कमरे से निकल कर मॉम के कमरे के पास गई.. गेट को नॉक करने ही वाली थी कि दूसरे कमरे से कुछ आवाजें सुनाई दीं। वो कमरा मेरी आंटी का था.. मैं धीरे से उस कमरे के पास गई और खिड़की से झाँक कर अन्दर देखा तो मेरे होश उड़ गए।
पूजा- ऐसा क्या देखा तूने आंटी के कमरे में.. बता ना यार?
पायल- मेरी आंटी एकदम नंगी लेटी हुई थीं और मेरे पापा उनके मम्मों को चूस रहे थे, उनके नीचे हाथ से रगड़ रहे थे।
पूजा- ओह वाउ.. तेरे पापा अगर आंटी के साथ थे तो तेरी मॉम अकेली क्या कर रही थीं।

पायल- मॉम अपने कमरे में सोई हुई थीं। उनको ऐसी हालत में देख कर मुझे कुछ समझ नहीं आया। उस समय सेक्स का पता भी नहीं था.. मैं डर गई और जल्दी से मॉम के कमरे की तरफ़ भागी और नॉक किया।



Quote

अपडेट  १८

अब तक आपने पढ़ा..

पूजा- ओह वाउ.. तेरे पापा अगर आंटी के साथ थे तो तेरी मॉम अकेली क्या कर रही थीं।
पायल- मॉम अपने कमरे में सोई हुई थीं। उनको ऐसी हालत में देख कर मुझे कुछ समझ नहीं आया। उस समय सेक्स का पता भी नहीं था.. मैं डर गई और जल्दी से मॉम के कमरे की तरफ़ भागी और नॉक किया।


अब आगे..

पूजा- अरे तेरी की.. कर दी ना गड़बड़.. पहले चुदाई का खेल तो देखती.. उसके बाद क्या हुआ.. तेरी मॉम उठ गई होगी और झगड़ा शुरू हो गया होगा?
पायल- नहीं ऐसा कुछ नहीं हुआ.. तू आगे तो सुन.. नॉक के साथ ही दरवाजा अपने आप खुल गया। मैं धीरे से अन्दर गई तो मॉम बैठी रो रही थीं मुझे देख कर अपने आँसू पोंछे।

मॉम- अरे बेटा क्या हो गया.. इतनी रात को तू यहाँ क्यों आई है?
पायल- मॉम मेरे सर में बहुत दर्द हो रहा है.. इसलिए आई हूँ।
मॉम- अरे आ.. मैं दवा दे देती हूँ.. सब ठीक हो जाएगा।

मैं मॉम के पास जाकर बैठ गई.. वो बड़े प्यार से मेरा सर दबाने लगी।
पायल- मॉम सब ठीक तो है ना..
मॉम- हाँ बेटा सब ठीक है.. क्या हुआ.. तूने यह सवाल क्यों पूछा?
पायल- सब ठीक है तो आप रो क्यों रही थीं?

मॉम- नहीं बेटा.. मैं कहाँ रो रही हूँ.. वो वो बस ऐसे ही आँख में कुछ चला गया था।
मॉम ने बहुत कोशिश की.. मुझे टालने की.. मगर उनकी आँखों से 2 बूँद आँसू और आ गए।
पायल- नहीं मॉम.. कुछ तो बात है.. देखो आपकी आँख फिर से भर आईं और पापा कहाँ हैं?
मॉम- मैंने कहा ना.. कुछ नहीं हुआ और तेरे पापा को कुछ काम था.. वो बाहर गए हैं।
पायल- मॉम आप झूठ बोल रही हो.. मैंने पास के कमरे में सब देखा है.. पापा और आंटी..

मैं आगे कुछ बोलती.. मॉम ने मुझे एक चांटा मार दिया और मुझे सीने से चिपका कर रोने लगीं।

मॉम- आई एम सॉरी बेटा.. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो.. मैंने तुम्हें मारा.. तेरे पापा को ये बात मत कहना.. वो नाराज़ होकर कहीं चले जाएँगे.. बेटा मेरी तो लाइफ बर्बाद हो गई। अब अगर तेरे पापा चले गए तो हम सब की जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। तू अभी बच्ची है.. भूल जा सब.. किसी को कुछ मत कहना।

पायल- लेकिन मॉम ये सब क्या है.. वो इतने गंदे काम कर रहे हैं.. आप कुछ बोलती क्यों नहीं?
मॉम- चुप रह तू.. मैंने कहा ना.. तेरी आंटी का घर में आना मेरी जिंदगी में तूफान से कम नहीं.. तेरे पापा अब बदल गए हैं। बस अब तू ये बात किसी को मत बताना.. ले दवा ले.. चुपचाप अपने कमरे में चली जा..

मॉम ने मुझे दवा देकर वहाँ से भेज दिया। जब तक मैं अपने कमरे में नहीं चली गई.. वो दरवाजे पर खड़ी मुझे देखती रहीं।
बस उस दिन से मुझे मेरी आंटी से नफ़रत हो गई। मेरे पापा बहुत अच्छे थे.. मगर उनके आने के बाद वो काफ़ी बदल से गए, अक्सर मेरी मॉम को मैंने रोते देखा है।
मुझे पता लग गया कि ये सब सेक्स के कारण हुआ और बस मुझे सेक्स से नफ़रत हो गई।

पूजा- अरे यार तेरी मॉम के साथ तो बुरा हुआ.. वैसे तू गलत है यार तेरे पापा के कांड के कारण तू सेक्स से क्यों नफ़रत करती है। तुझे उनसे नफ़रत करनी चाहिए थी। अपनी लाइफ क्यों बर्बाद कर रही हो?

पायल- नो वे.. मेरे पापा मुझे अभी भी उतना ही प्यार करते हैं। ये सब तो मेरी आंटी का किया-धरा है.. मैंने बहुत बार उनको जलील भी किया.. मगर वो पक्की रंडी हैं उनके कानों पर जूँ तक नहीं रेंगती.. बस इसी सब के चलते मुझे हॉस्टल में आना पड़ा.. घर में घुटन सी होने लगी थी मुझे, मैंने पापा को राज़ी किया कि मुझे पढ़ाई में दिक्कत है.. हॉस्टल में रह कर ठीक से पढ़ाई कर सकूँगी।

पूजा- तेरे पापा को पता है कि तू उनके राज़ जान गई है?
पायल- ये मैं नहीं जानती.. शायद उस रंडी ने उनको बताया होगा.. मगर मैंने कभी पापा को यह बात नहीं कही और ना ही कभी उनको मेरे आगे शरमिंदा होना पड़ा.. वो मेरी हर बात मानते हैं। मुझे बहुत प्यार करते हैं। मैं चाहती तो उनको उस रंडी से दूर कर सकती थी.. अपनी कसम देकर मगर मैं अपने पापा को अपनी नज़रों में गिरने नहीं दे सकती.. इसलिए मैंने कुछ नहीं कहा।

पूजा- वाह यार.. तू भी कमाल की है.. आंटी को रंडी और पापा को कुछ नहीं.. ये भेदभाव क्यों?
पायल- मेरे पापा शुरू से अच्छे थे और अब भी अच्छे हैं.. उस रंडी ने उनको बहका दिया.. उसमें पापा का क्या कसूर? मेरी माँ ओल्ड टाइप की हैं.. और वो रंडी मॉर्डन.. बला की खूबसूरत.. जिसे देख कर वो क्या.. कोई भी बहक जाए.. खास कर जब कि वो अपने हुस्न के जलवे दिखाए.. समझी?

पूजा- अच्छा तो ये बात है.. तेरी आंटी जलवा दिखाती हैं.. मगर ये तो बता तेरे अंकल कहाँ हैं? वो कैसे कुछ नहीं कहते?
पायल- यार अब बस भी कर.. क्या बकवास टॉपिक लेकर बैठ गई? तू अपनी सुना ना.. कैसे तूने पहली बार सेक्स किया था और किसके साथ किया था?
पूजा- अरे ये टॉपिक तो तेरे टॉपिक से भी ज़्यादा बकवास है.. तू सुन नहीं पाएगी और वैसे भी तेरी नज़र में मेरी इज्जत कम है.. वो बात सुनकर तो तू मेरे को थर्ड क्लास रंडी का दर्जा दे देगी।
पायल- अरे नहीं नहीं.. ऐसा कुछ नहीं है.. मैं क्यों तुझे गलत समझूँगी.. यार तेरी लाइफ है.. तू जैसे चाहे जिए.. चल बता..

अब पूजा आराम से सीधे होकर बैठ गई और वो बोली- अब पूरी बात सुनने के बाद ही कुछ बोलना समझी..
पायल ने कुछ सोचा और खड़ी हो गई।
पूजा- अरे क्या हुआ.. तेरे को मेरी बात नहीं सुनना क्या?
पायल- अरे नहीं नहीं.. सुन रही हूँ ना.. लेकिन तू शुरू करे उसके पहले मैं बाथरूम जाकर आती हूँ.. ताकि बाद में तेरी बात काटकर ना जाऊँ.. बड़े जोरों की लगी है यार..
पूजा- अरे अभी असली मज़ा शुरू भी नहीं हुआ और तेरी चूत रिस गई क्या.. हा हा हा हा.. जा जल्दी आना..
पायल- तू बहुत बेशर्म है.. अब बाथरूम जाने में भी गंदी बात बोल दी.. तू नहीं जाती क्या..
पूजा- अच्छा बाबा सॉरी.. अब जा जल्दी आ जाना ओके..

पायल के जाने के बाद पूजा वहीं बैठ कर पुराने लम्हों को याद करके मुस्कुराने लगी।
दोस्तो, अब पायल जब तक नहीं आ जाती.. यहाँ हम क्या करेंगे.. चलो हमारे दोनों हीरो को देख लेते हैं।

पुनीत और रॉनी खाने के बाद अपने कमरे में बैठे थे.. तभी वहाँ मुनिया आ गई.. जिसे देख कर दोनों के होश उड़ गए क्योंकि मुनिया ने अपने जिस्म पर सिर्फ़ एक तौलिया लपेटा हुआ था।

पुनीत- अरे मुनिया.. ये क्या.. ऐसे अधनंगी क्यों घूम रही हो.. क्या इरादा है तुम्हारा.. क्यों हमारा ईमान खराब कर रही हो तुम?
मुनिया- बाबूजी.. आप बुरा ना मानना.. मगर आप जैसे बेईमान का ईमान कहाँ होता है.. मुझे काम के बहाने यहाँ लाए और यहाँ मुझसे दूसरा ही काम करवा रहे हो।
रॉनी- हा हा हा मेरी जान.. ऐसे तो ना कहो.. हमने काम ही कहा था और मालिश की बात की थी.. उसके अलावा क्या बेईमानी की.. बता तू?

मुनिया- अब रहने दो.. आप लोगों ने तो इतना बड़ा बम्बू मेरी छोटी से जगह में घुसा दिया.. ये कौन सा काम हुआ?
पुनीत- अरे अभी भी तेरी शर्म नहीं निकाली क्या.. जगह नहीं चूत बोल चूत.. हा हा.. और ये तो बता ऐसे क्यों आई है?
मुनिया- अब कपड़े पहने का फायदा ही क्या.. कुछ देर बाद तो आप निकाल ही दोगे.. मैंने सोचा ऐसे ही आपके पास चली आती हूँ.. और एक बात भी पूछनी है।

रॉनी- आ जाओ मेरी जान.. यहाँ आओ.. सही कहा.. जब नंगी होना ही है तो कपड़े पहने का फायदा क्या.. बोल क्या बात पूछनी थी तेरे को?
मुनिया- वो आप कल चले जाओगे तो मैं यहाँ अकेली क्या करूँगी.. आप मुझे अपने साथ शहर ले चलो ना..
पुनीत- अरे मुनिया रानी.. तुझसे अब दूर कहाँ रहा जाएगा.. बस कुछ दिन की बात है.. हम वापस आ रहे हैं ना.. और तू यहाँ मत रहना तुझे वापस गाँव छोड़ देंगे.. जब दोबारा आएँगे तू साथ आ जाना समझी..

मुनिया ने ‘हाँ’ में सर हिलाया और खुश हो गई। अब वो दोनों के बीच में बैठी हुई थी और शर्मा रही थी।
पुनीत धीरे-धीरे उसके गालों को सहला रहा था और रॉनी उसकी जाँघों को दबा रहा था। मुनिया ने आँखें बन्द कर ली थीं.. और आने वाले पलों के बारे में सोच कर मज़ा ले रही थी।

पुनीत- उफ़फ्फ़ मुनिया.. तेरे ये पतले होंठ मुझे पागल बना रहे हैं कल क्या मज़ा दिया था तूने.. अपने इन मुलायम होंठों से मेरे लंड को.. आह्ह..
रॉनी- हाँ.. मुनिया तू लौड़ा बहुत अच्छा चूसती है.. चल आज तुझे घोड़ी बना कर चोदूँगा में.. और तू भाई का लौड़ा चूस के मज़ा ले.. चल आ जा..

मुनिया- नहीं बाबूजी.. मैंने कहा था ना.. दोनों एक साथ मत करना.. मुझे बहुत दुःखता है।
रॉनी- अरे यार दोबारा वही बाबूजी.. बड़ा अजीब लगता है.. नाम लो यार तुम.. उसमें ज़्यादा मज़ा आएगा।
पुनीत- अरे मुनिया.. दो का मज़ा ही कुछ और होता है.. आज तेरे को डबल का असली मज़ा देंगे.. तू बस देख और रॉनी ठीक कहता है.. नाम ले हमारा..
मुनिया- अच्छा पुनीत जी.. आप जैसा कहो.. ठीक है.. अब मैं मना नहीं करूँगी.. जैसे चाहे चोद लो मुझे.. बस खुश.. अब शुरू हो जाओ..
रॉनी- ये हुई ना बात मेरी जान.. अब आएगा असली मज़ा..


Quote

अपडेट  १९

अब तक आपने पढ़ा..

मुनिया- अच्छा पुनीत जी.. आप जैसा कहो.. ठीक है.. अब मैं मना नहीं करूँगी.. जैसे चाहे चोद लो मुझे.. बस खुश.. अब शुरू हो जाओ..
रॉनी- ये हुई ना बात मेरी जान.. अब आएगा असली मज़ा..


अब आगे..

मुनिया- रॉनी जी.. एक बात कहूँ.. मुझे आज पूरा मज़ा दे दो.. ताकि कल जब आप लोग चले जाओ.. तो मैं बस आपको याद करके दिन बिताऊँ..
रॉनी- हा हा हा हा.. देखा भाई.. यह है लंड का चस्का.. साली एक दिन में ही हमारी गुलाम हो गई।
पुनीत- हाँ.. अब ऐसे मस्त लौड़े इसे कहाँ मिलेंगे.. चल मेरी जान.. पहले हम दोनों के लौड़े को चूस कर चिकना कर.. उसके बाद तेरी चुदाई करेंगे..

इतना कहकर दोनों ने अपने कपड़े निकाल दिए और बिस्तर पर सीधे लेट गए, मुनिया ने भी अपना तौलिया उतार दिया, अब वो भी नंगी थी और दोनों के पैरों के बीच बैठ कर दोनों हाथों से एक साथ दोनों के लौड़े सहला रही थी।

पुनीत- आह्ह.. तेरे हाथ भी कमाल के हैं लंड को छूते ही इसमें करंट पैदा हो जाता है.. देख ये कैसे अकड़ने लग गया है..
मुनिया- पुनीत जी.. आप भी बहुत उतावले हो.. रॉनी जी को देखो कैसे आँखें बन्द किए हुए मज़ा ले रहे हैं अब बस आप चुप रहो.. मुझे प्यार से सब करने दो..

उसके बाद कोई कुछ ना बोला और मुनिया बारी-बारी दोनों के लंड चूसने लगी.. जो अब पूरे विकराल रूप में आ गए थे।
मुनिया एक्सपर्ट तो नहीं थी मगर अपनी पूरी कोशिश कर रही थी कि किसी तरह दोनों को पूरा मज़ा दे सके।

पुनीत- उफ्फ.. जालिम ऐसे ना चूस.. नहीं लौड़ा चूत में जाने से पहले ही ठंडा हो जाएगा..
रॉनी- आह्ह.. मज़ा आ रहा है भाई.. इसके 2 होल तो खोल दिए हमने.. आज तीसरा भी खोल ही देते हैं।

उन दोनों की बात सुनकर मुनिया ने लौड़ा मुँह से निकाला और सवालिया निगाहों से उनको देखने लगी।
पुनीत- अरे क्या हुआ.. चूस ना मेरी रानी रुक क्यों गई..
रॉनी- लगता है थक गई भाई.. या इसकी चूत बहुत गीली हो गई है शायद..
मुनिया- आप दोनों ना बस गंदी बातें करना जानते हो.. ये होल का क्या मतलब है.. ये तो बताओ?

रॉनी- अरे होल नहीं जानती.. हा हा हा अरे जानेमन.. हम तेरे छेद की बात कर रहे हैं देख एक तेरा मुँह भी एक छेद है.. जिसका मज़ा हमने ले लिया.. दूसरा छेद है.. तेरी फड़कती चूत.. जिसको हमने खोल दिया। अब आख़िर का छेद बचा तेरी गाण्ड का.. आज उसको भी खोल कर तुझे पूरी तरह औरत बना देंगे हा हा हा हा..

मुनिया- नहीं नहीं बाबूजी.. भगवान के लिए आज ऐसा कुछ ना करना.. वरना कल माँ के सामने नहीं चल पाऊँगी.. मेरी फुद्दी में ही अभी बहुत दर्द है.. इसका दर्द तो ख़त्म होने दो.. अगली बार आऊँगी तो जो चाहे कर लेना.. मगर आज नहीं..
पुनीत- अरे डरती क्यों है.. कुछ नहीं होगा.. तू हमें जानती नहीं है.. चोदने के पक्के खिलाड़ी है हम..

मुनिया- नहीं पुनीत जी.. बस मेरी ये बात मान लो.. आपको भगवान की कसम है.. अगर मेरी बात ना मानी तो..
रॉनी- अरे डर मत.. जा आज नहीं करेंगे.. मगर जल्दी ही तेरी मुलायम गाण्ड का मुहूरत मैं ही करूँगा.. ठीक है..
पुनीत- अरे तू क्यों.. मैं करूँगा.. इतनी प्यारी गाण्ड को तो मैं ही खोलूँगा..
रॉनी- नहीं भाई अपने चूत को खोला है ना.. अब गाण्ड की बारी मेरी है.. समझे आप..

मुनिया- हा हा हा दोनों लड़ाई मत करो.. सिक्का उछाल कर तय कर लेना कि कौन पहले करेगा..
रॉनी- अगर ऐसी ही बात है तो सिक्का क्यों.. हम ताश का गेम खेल कर तय करे लेंगे.. क्यों भाई क्या कहते हो.?
पुनीत- अरे हार जाएगा.. तू जानता है ना.. किस्मत हमेशा मेरे साथ होती है तीन इक्के लाऊँगा हा हा हा..

रॉनी- वो तो समय आने पर पता लगेगा भाई.. कि कौन जीतेगा.. अभी क्यों मूड खराब करना.. इतनी प्यारी कन्या चूत फैलाए पड़ी है.. इसका तो इन्तजाम कर दे पहले..
पुनीत को रॉनी की बात समझ आ गई उसने मुनिया को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके निप्पल चूसने लगा।
इधर रॉनी ने उसकी चूत को अपना निशाना बनाया और चाटने लगा..

मुनिया- आह्ह.. नहीं उफ्फ.. रॉनी जी आह्ह.. दुःखता है.. आह्ह.. ऐसे ना करो ना.. आ…

रॉनी चूत के दाने को जीभ से हिला रहा था.. कभी पूरी चूत को होंठों में दबा कर ज़ोर से चूसने लगता.. जिससे मुनिया की सिसकी निकल जाती.. ऊपर से पुनीत उसके निप्पल को दाँतों से दबा कर मज़ा दे रहा था।
उन दोनों के लौड़े उफान खाने लगे थे.. अब वासना का तूफान अपने चरम पर पहुँच गया था।

रॉनी- उफ्फ.. नारियल पानी से भी ज़्यादा टेस्टी रस है तेरी चूत का.. चल जानेमन अब तेरी चूत को ठंडा करता हूँ.. जल्दी से बन जा घोड़ी.. देर मत कर..

पुनीत बिस्तर से टेक लगा कर बैठ गया और मुनिया पुनीत के पैरों की तरफ़ मुँह करके घोड़ी बन गई।
अब पुनीत का खड़ा लंड उसके मुँह के पास था, उधर पीछे रॉनी लौड़े को चूत पर टिका कर शॉट लगाने की तैयारी में था।

पुनीत- अरे मुनिया रानी.. तू तो बहुत ज़बरदस्त घोड़ी बनी है रे.. चल.. सोच क्या रही है.. चारा तेरे सामने है.. तो खा ना.. हा हा हा..

मुनिया मुस्कुरा कर लौड़े को मुँह में लेके चूसने लगी और रॉनी ने सुपारा चूत में घुसा कर धक्का मारा.. तो दर्द के मारे मुनिया आगे को सरक गई। मगर रॉनी ने उसकी कमर को मजबूती से पकड़ कर ज़ोर का धक्का मारा.. पूरा लौड़ा चूत में समा गया और मुनिया दर्द से कराह उठी। मगर पुनीत का लौड़ा मुँह में था तो बस बेचारी कसमसा कर रह गई..

रॉनी- आह्ह.. मुनिया.. तेरी चूत तो मक्खन जैसी है.. मज़ा आ गया रानी.. अब घोड़ी ठीक से बनी रहना.. मैं रफ़्तार बढ़ा रहा हूँ.. तेरी सवारी का मज़ा आराम से लेने में मज़ा नहीं आएगा.. जितनी स्पीड तेज होगी.. उतना ज़्यादा लुत्फ़ मिलेगा मेरी जान..।

रॉनी अब चूत में लौड़े की ठोकमठोक करने लगा था.. उधर बेचारी मुनिया आगे पुनीत के लौड़े से और पीछे रॉनी के लौड़े से चुद रही थी। फ़र्क ये था पुनीत आराम से बैठा था और मुनिया मुँह आगे-पीछे करके उसके लौड़े को चूस रही थी और रॉनी अपनी कमर को स्पीड से हिला रहा था।

पुनीत- आह्ह.. चूस जान उफ्फ.. तेरा मुँह भी चूत जैसा मज़ा दे रहा है आह्ह..

रॉनी 10 मिनट तक स्पीड से चुदाई करता रहा। इधर पुनीत भी लौड़े की चुसाई से बेहाल हो गया था। अब दोनों ने पोज़ चेंज किया। रॉनी सामने बैठा और पुनीत चूत को पेलने लगा।

रॉनी- आह तेरी चूत में जो मज़ा है.. आ अब मुँह से वैसा ही मज़ा दे.. होंठ भींच कर चूस मेरी जान…

पुनीत स्पीड से लौड़े को आगे-पीछे करने लगा.. वो झड़ने वाला था। इधर रॉनी का भी हाल बुरा था.. वो मुनिया के मुँह को ज़ोर से चोदने लगा.. कमर को झटके देने लगा। तभी उसके लौड़े ने मुनिया के मुँह में माल गिरा दिया.. इधर पुनीत भी चूत में लावा भरने लगा।
इस दौरान मुनिया 2 बार झड़ चुकी थी उसकी कमर दुखने लगी थी। उसकी चूत का तो हाल पूछो मत.. पहले ही सूजी हुई थी.. अब तो और सूज गई, वो बेहाल सी होकर एक तरफ़ लेट गई..

दोस्तो, मुनिया ने तो दो का मज़ा एक साथ ले लिया.. अब यहाँ रुकने का फायदा नहीं.. इनको थोड़ा आराम करने दो.. वहाँ पायल वापस आ गई होगी.. तो वहाँ चलते हैं।

पायल आकर पूजा के पास बैठ गई और कहा- अब सुना तेरी कहानी..
पूजा- ठीक है सुन.. अब से 3 साल पहले की बात है.. जब मैं 18 साल की थी.. घर में मॉम-डैड के अलावा मेरा बड़ा भाई पुरषोत्तम उर्फ पुरु और छोटा भाई राजू भी है। पुरु उस समय 22 का था और कॉलेज में लास्ट इयर की पढ़ाई कर रहा था और राजू कम उम्र का था।

पायल- छी: पुरषोत्तम.. इतना पुराना नाम है तेरे भाई का?
पूजा- ओए.. मेरे भाई के बारे में कुछ मत बोलो.. आई लव माय ब्रदर और यह मेरे दादा का नाम था.. सो डैड ने भाई को ये नाम दिया.. मगर सब उसे पुरु ही कहते हैं समझी..!
पायल- अच्छा अच्छा आगे बता क्या हुआ कैसे तू सेक्स की

पूजा- हाँ.. सुन ना यार.. मेरा भाई मुझे बहुत प्यार करता था। वो बहुत स्मार्ट ब्वॉय है.. और मेरा फिगर भी उस समय 28-24-30 का था। एरिया के सब लड़के मुझे देख कर कमेन्ट करते थे कि इसके अमरूद छोटे हैं कौन खुशनसीब होगा जो इन्हें सेब बनाएगा.. मगर मैं समझ नहीं पाती थी। तू तो शायद अभी इतनी नादान नहीं है.. मगर मैं बहुत भोली थी।

पायल- सच्ची तू इतना नहीं समझती थी.. ये तो सोचने वाली बात है और 3 साल पहले तेरे मम्मे इतने छोटे थे और अब इतने बढ़ गए.. ये कमाल कैसे?
पूजा- अरे कहानी सुनेगी तो सब समझ जाएगी कि ये अमरूद को खरबूज कैसे बनाया जाता है हा हा हा..


Quote





Online porn video at mobile phone


sexy porn stories in urduslutwives.com storiesindian randi picsadult comics hinditollywood nude.combachi ki gandsexy story hindi mainहनिमून मिञाचि बायको मराठी सभोग कथाlund ki chusaibangladeshi adult forumahsaas channa hot picsnippals ragadna wallpepartamil housewife photosincest cartoon sex comicschachi k sathcrazy bhabianjali tarak mehta ka ooltah chashmahrajasthani hot womendesi wifesdps mms scandal clip 2004boob pressing storydesi sex kahaniyanmarathi font sex storysex stories in hindi fontdesi hidden cam picsblue films xxx videotamil sex antiesபெண்கள் அதிக நேரம் யூரின் அடக்கpdf hindi sex storypuku dengulata storiesseducing my momஅவளை சுவரில் சாத்து வைத்து கைகளை அகல விரித்து சுவற்றில் வைத்துbangla 3x imageshemal fuck picpuku picsgand ka chedodia sex storiesdesi gandlucy fire picsindian xxx telugusexsi hindi kahaniyaaunties hot imagebhabhi ki sahelidd boobs picturespapa ka dosttamil aunty exbiixbii storiestelugu pinni dengudu kathaluseva ka mevaurdu sexy stroysurdu font sexy kahaniyanxoissp என் அம்மா ஊம்புrape ki storyshakila hot stillsfucking pakisexfee.comi seduced my cousinfucking the bosses wifefree prons videodesi aunty unseenxxx tamil actressesbiwi ki chut ni dilaya parmosansexy storyzdeshi sexy storieshot tamil sex kathaikalmallu aunty showingreal sex stories teluguhot desi stories in englishbestincestshakeela hotswww.xxx flimkajal agarwal fakessexy masala storiesexbii seriesdesi mallu storytamil matter kamakathaikalbache ki susu se khelitelugu anuties sexsex stori hindi medoodh storiesdidi bolidesy hindi sexy storytelugu sex stories in telugu lipitamilsex storyesmalaysian boobswww.hindi sex khaniyabhabhi ko choda hindi story